1 Corinthians 14

1 प्रेमक पाछाँ भागू! आ हँ, परमेश्वर सँ आत्माक वरदान माँगू। मुदा सभ सँ बेसी ई माँगू जे अहाँ परमेश्वरक वचन ओहि शब्दमे सुनाबी जेकरा लोक बुझि सकय।

6 भाइ आ बहिन सभ, सोचू। जँ हम आबी आ कोनो अनजान भाषामे बाजय लागी जेकरा एतय कियो नहि जनैत अछि, तँ ओकरा सँ अहाँकें की लाभ हैत? किछु नहि। जखन धरि हम अहाँकें किछु अहन नहि दी जे अहाँ बुझि सकी। किछु अहन जे परमेश्वर हमरा देखेलनि अछि। किछु जे हम सिखलौं अछि। परमेश्वरक दिस सँ कोनो सन्देश। किछु जे हम अहाँकें सिखा सकी।

20 भाइ आ बहिन सभ, बच्चा जकाँ सोचब बन्द करू। जखन खराब काज करबाक बात आबय, तँ हँ, ओहि बच्चा जकाँ बनू जे ई सेहो नहि जनैत अछि जे खराब की होइत छै। मुदा जखन अहाँ सोचैत छी, तँ परिपक्व बनू।

26 तँ भाइ आ बहिन सभ, की हेबाक चाही? जखन अहाँ सभ एक सँग जमा होइत छी, तँ कोनो एक लोक गीत अनैत अछि। दोसर लोक किछु सिखयबाक लेल अनैत अछि। दोसर ओ बात अनैत अछि जे परमेश्वर ओकरा एखने देखेलनि अछि। दोसर लोक अनजान भाषा अनैत अछि। आ दोसर लोक ओहि भाषाक अर्थ अनैत अछि। अहाँ जे किछु करैत छी, ओकरा सँ एक-दोसरकें मजबूत हेबाक चाही!

34 कलीसिया सभमे, पत्नीकें चुप रहबाक चाही। हुनका सभकें बाजबाक अनुमति नहि छनि। हुनका सभकें अप्पन पाहुनक आज्ञा मानबाक चाही, ठीक ओहिना जेना व्यवस्था कहैत अछि।